वो ससुर की चुटकी, वो सास के ताने;
आज याद आ गए वो दिन पुराने।
जब उसके घर आई थी मेहमान बनकर;
और उसकी मुहब्बत ने मेज़बानी दे दी।
जब लड़कपन बदलते ही थे घर बदले;
और इश्क़ ने मुझे भी एक कहानी दे दी।
आज, जब वो सहमी सी, मेरे घर आएगी;
जब मुझे सास कहकर रुकेगी, मुस्कुराएगी..
नए रूप में फिर आएँगे वो गुज़रे ज़माने।
तभी याद आ गए वो दिन पुराने।
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आज याद आ गए वो दिन पुराने।
जब उसके घर आई थी मेहमान बनकर;
और उसकी मुहब्बत ने मेज़बानी दे दी।
जब लड़कपन बदलते ही थे घर बदले;
और इश्क़ ने मुझे भी एक कहानी दे दी।
आज, जब वो सहमी सी, मेरे घर आएगी;
जब मुझे सास कहकर रुकेगी, मुस्कुराएगी..
नए रूप में फिर आएँगे वो गुज़रे ज़माने।
तभी याद आ गए वो दिन पुराने।
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