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Tuesday, November 18, 2014

नया रक़्स


फिर ले आया मैं, गुज़रे तराने तेरे दर पर।   
उन्हें गुनगुनाने, तुझको सुनाने, फिर आया इसी बहाने तेरे दर पर।
 
आ, फिर कोई नया रक़्स, मुझको सिखाने के लिए आ।
कुछ और सफर तै कर; कुछ नयी मंज़िलें पाने के लिए आ।
लबरेज़ हूँ मैं भी, तू भी; इश्क़ के रंग में।
ले, फिर आया मैं, फाग मनाने तेरे दर पर।

अब भी याद हैं वो अल्फ़ाज़, बस तेरे बिन जुबां पर नहीं आते।
आ, फिर वही ग़ज़ल, मेरे  संग गाने के लिए आ।
या छेड़ कोई नया सुर.. मुहब्बत का।
ऐ पर्दानशीं, देख.. मैं लाया हूँ साज़ सारे तेरे दर पर।  

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रक़्स: नृत्य

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