Search This Blog

Thursday, November 20, 2014

सुक़ून

रौशन हुआ ये आसमां; रौशन हुई सारी ज़मीं..
रौशन हुआ दिल का जहां; मेरी ज़ुल्मत तेरे नूर में बह गयी।

मेरा हर अँधेरा मिट गया; जब तू मिला तो नूर मिला..
जब तू मिला, राहें मिलीं; मंज़िल मिली, काफ़िला मिला।

मेरी स्याह रातों को सुबह का ज़रिया सा तू..
मेरी बर्फ साँसों को आग का दरिया सा तू।

जब तू मिला, तो सुरूर मिला;
वुज़ू मिला, सुक़ून मिला।

---



No comments:

Post a Comment